भारत में चीता परियोजना के तीन वर्ष पूरे: कूनो से गांधीसागर तक फैल रहा कुनबा

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भारत में चीता परियोजना के तीन वर्ष पूरे: कूनो से गांधीसागर तक फैल रहा कुनबा

भारत की धरती पर तीन साल में जन्मे 24 शावक, 8 की मौत, 16 कर रहे सर्वाइव

कूनो राष्ट्रीय उद्यान में कुल 25 चीते, 9 बाड़े में और 16 खुले जंगल में घूम रहे

श्योपुर। लगभग 70 साल बाद भारत की धरती पर चीतों के पुनस्र्थापन के लिए कूनो का जंगल सफलतम साबित रहा है। आज 17 सितंबर 2025 को चीता परियोजना के तीन वर्ष पूर्ण होने जा रहे हैं। इन तीन वर्षों में चीतों के संघर्ष की भी एक अलग कहानी रही है। हालांकि साल 2025  चीतों के लिए अधिक संघर्षों से भरा रहा। इस वर्ष जन्मे सात शावकों में दो की मौत के बाद पांच नए मेहमानों के साथ चीतों का कुनबा बढक़र 25 हो चुका है। भारत की धरती पर विगत तीन वर्षों में 24 शावक जन्म ले चुके हैं। हालांकि इनमें से आठ की मौत हो चुकी है लेकिन सुखद बात यह है कि 16 भारतीय शावक अब भी जंगल में संघर्षों के बीच अपना कुनबा बढ़ाने की ओर अग्रसर हैं। कूनो राष्ट्रीय उद्यान में इस समय कुल 25 चीते हैं। जिनमें से 16 चीते कूनो सहित आस-पास के क्षेत्र के खुले जंगल में हैं जबकि 9 चीते बाड़े में प्रबंधन की निगरानी में हैं।

गांधी सागर अभयारण्य भेजी गई मादा चीता धीरा 

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कूनो राष्ट्रीय उद्यान प्रबंधन के अनुसार भारत में चीतों के पुनस्र्थापन के लिए कूनो के जंगल को सबसे उत्तम माना गया।  17 सितंबर 2022 को प्रधानमंत्री मोदी ने चीता प्रोजेक्ट की शुरुआत करते हुए नामीबिया से यहां 8 चीतों को कूनो राष्ट्रीय उद्यान के बाड़े में छोड़ा था।  कूनो राष्ट्रीय उद्यान से दो नर चीता प्रभास और पावक को 20 अपै्रल 2025 को गांधी सागर भेजा गया था। चीतों के बेहतर रूप से सर्वाइव करने के बाद अब दक्षिण अफ्रीकी मादा चीता धीरा को आज भारतीय चीता प्रोजेक्ट दिवस के अवसर पर गांधी सागर अभयारण्य भेज दिया गया। जहां यह मादा चीता अपना कुनबा बढ़ाएगी।

राजस्थान तक दस्तक दे चुके चीता

विगत तीन वर्षों में कूनो राष्ट्रीय उद्यान के खुले जंगल में छोड़े गए चीते मध्य प्रदेश के कई क्षेत्रों को अपनी रफ्तार से नापने के साथ-साथ राजस्थान तक दस्तक दे चुके हैं। समीपस्थ राजस्थान में पहुंचने का सबसे पहला प्रयास चीता अग्नि ने दिसंबर 2023 में किया था जो राजस्थान के बारां जिले में पहुंच गया था। जिसे कूनो राष्ट्रीय उद्यान प्रबंधन की टीम द्वारा ट्रंकुलाइज करने के बाद वापस लाया गया था। वहीं दूसरी कोशिश चीता पवन ने 4 मई 2024 को की थी। जो चंबल नदी के मंडराई होते हुए राजस्थान के करौली क्षेत्र में पहुंच गया था। इसके बाद गत 11 अगस्त 2025 को मादा चीता ज्वाला चंबल नदी को पार करते हुए सवाई-माधोपुर जिले की खंडार तहसील पहुंच गई थी। जिसे कूनो राष्ट्रीय उद्यान प्रबंधन की टीम द्वारा रेस्क्यू कर वापस लाया गया था।

चीता परियोजना के पूर्ण तीन वर्ष
चीता परियोजना के आज तीन वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। भारत में कूनो राष्ट्रीय उद्यान की धरती से चीतों का पुनस्र्थापन एक सराहनीय प्रयास है। चीता परियोजना को बढ़ावा देने के लिए आज मादा चीता धीरा को गांधी सागर अभयारण्य भेजा गया है। इससे पहले दो नर चीता प्रभाव और पावक को गांधी सागर अभयारण्य भेजा जा चुका है।

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