संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार, 1 दिसंबर से शुरू होकर 19 दिसंबर तक चलेगा, लेकिन सत्र शुरू होने से पहले ही इसके बेहद हंगामेदार होने के संकेत साफ नज़र आने लगे हैं। रविवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक में यह कोशिश की गई कि सत्र सुचारु रूप से चले, लेकिन करीब ढाई घंटे चली इस बैठक में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच किसी भी तरह की सहमति नहीं बन सकी। विपक्ष इस मुद्दे पर चर्चा की मांग कर रहा है, जबकि सरकार इसे सदन की प्रक्रिया और नियमों से जोड़ती हुई एडवाइजरी कमेटी पर छोड़ रही है।
इस अहम बैठक में सरकार की ओर से राजनाथ सिंह, बीजेपी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू मौजूद रहे। वहीं विपक्ष की ओर से कांग्रेस के गौरव गोगोई, प्रमोद तिवारी, जयराम रमेश, सपा के रामगोपाल यादव, राजद के मनोज झा, बीजेडी के सस्मित पात्रा, टीएमसी के डेरेक ओ’ब्रायन और कल्याण बनर्जी, DMK के टीआर बालू समेत करीब 36 दलों के 50 प्रतिनिधि शामिल हुए।
कांग्रेस ने साधा निशाना
बैठक की शुरुआत में ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने सरकार को घेरते हुए कहा कि पार्टी सदन में दिल्ली ब्लास्ट, वोट चोरी, और भटकी विदेश नीति को लेकर चर्चा की मांग करेगी। उन्होंने साफ कहा कि सरकार संवेदनशील मुद्दों पर जवाब देने से बच रही है।
सपा के रामगोपाल यादव ने SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाए और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि BLO पर इतना दबाव है कि वे आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं। उनका दावा था कि यूपी में दलित और पिछड़े वर्ग के मतदाताओं के नाम बड़ी संख्या में हटाए जा रहे हैं।
गौरव गोगोई क्या बोले
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने बैठक में सरकार को ये कहते हुए घेरा कि सत्र को जानबूझकर छोटा रखा गया है। उन्होंने दिल्ली में हाल ही में हुए धमाकों को गृह मंत्रालय की “विफलता” बताया और कहा कि बढ़ते प्रदूषण, पक्षपाती चुनाव आयोग और विदेश नीति के सवालों पर सरकार जवाब नहीं देना चाहती।
उनका आरोप था कि केंद्र सरकार “संसदीय परंपरा का क्षरण” कर रही है और कठिन मुद्दों से बचने की नीति अपना रही है।
कई विपक्षी दल SIR पर एकजुट
सीपीएम सांसद जॉन ब्रिट्रास ने कहा कि SIR पर पूरा विपक्ष एकमत है और इस मुद्दे पर चर्चा से पीछे हटने वाला नहीं। लिहाजा सत्र शुरू होने से पहले ही राजनीतिक हलचल तेज है। बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार शीतकालीन सत्र को शांतिपूर्ण ढंग से चलाना चाहती है और सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए खुली है, बशर्ते चर्चा नियमों के तहत हो। उन्होंने विपक्ष पर सत्र को “अनावश्यक गरम” करने का आरोप नहीं लगाया, लेकिन संकेत दिया कि वे “गरमागरम बहस से बचने” की अपील कर रहे हैं।
सरकार की सफाई
जब रिजिजू से पूछा गया कि क्या सरकार SIR पर चर्चा कराने के पक्ष में है, तो उन्होंने फैसला बिजनेस एडवाइजरी कमेटी और सदन के चेयर पर छोड़ दिया। दूसरी ओर, जेडीयू सरकार के साथ मजबूती से खड़ी नजर आई और कहा कि बिहार में SIR प्रक्रिया बिना शिकायत के पूरी की गई है।
टीएमसी का हमला
टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने सवाल उठाया कि अगर सरकार पारदर्शी है तो SIR पर बहस से क्यों डर रही है? उन्होंने कहा कि BLO पर दबाव लगातार बढ़ रहा है और चुनाव आयोग का रवैया “अहंकारपूर्ण” है।