प्रदेश सरकार गौवंश रक्षा के प्रति सजग है गौशालाओं के साथ बड़े-बड़े गौ अभ्यारण्य केन्द्र खोलने के लिये 100 बीघा से 200 बीघा जमीन पर करोड़ों रूपये खर्च कर गौवंश को बचाने का प्रयास कर रही है यह उसका हल नहीं है। गाय किसान की है किसान अनुउपयोगी गाय को छोड़ देता है। वह सड़कों पर बैठती है जो दुर्घटना का प्रमुख कारण बनती है यह सरकार के आगे बहुत बड़ी समस्या है इसका साधारण सा हल है गाय की गाय गाँव में रहे इसके लिये गाँव-गाँव गौशाला खोलने की माँग हम प्रदेश सरकार से करते है। न करोड़ों रूपये खर्च करना पड़ेंगें न ही 100-200 बीघा जमीन देनी पड़ेगी। हमारी दूसरी माँग गौभक्त मोहन सरकार से है कि गौवंश, अन्य प्रदेशों से और प्रदेश से कटने के लिये प्रदेश से होकर ही कत्ल-खानों तक पहुँचता है इसलिये उनको रोकने के लिये प्रदेश सीमाओं पर स्थित परिवहन चौक पोस्टों पर गौ रक्षा केन्द्र नयागाँव परिवहन चौक पोस्ट जो सन 2006 में परिवहन आयुक्त म.प्र. श्री एन.के. त्रिपाठी, गौ सेवा आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष श्री मेघराज जैन, परिवहन मंत्री श्री हिम्मत कोठारी जी को संज्ञान में अनुमती लेकर ग्वालियर की संस्था गौ संस्कार जागृति सेवा समिति ने किया था जो आज विशाल रूप ले चुका है काफी गौ वंश को हत्या से बचाकर नव-जीवन दे रही है।
इसलिये ऐसे प्रमुख – प्रमुख चौक पोस्टों जैसे सेंघना, बुराहनपुर, मुलताई, अदनाका, खवासा से गौकशी के करीब प्रतिमाह 200 से 300 कंटनर निकलते है ऐसी सूचना हमारे पास है इस प्रकार प्रदेश की गौभक्त मोहन सरकार हजारों गौ वंश की हत्या होने से बचा सकती है। प्रदेश सरकार की इस पहल को प्रदेशों की अन्य गौ भक्त सरकारें इस पर अमल करेगी। यदि प्रदेश सरकार ने इसे मुर्तरूप प्रदान नहीं किया तो मजबूरन प्रदेश के हजारों संत महात्मा, भागवतआचार्य गौभक्त, गौरक्षक तथा किसान आगे का कदम उठायेंगे ।