ग्वालियर | रतन ज्योति नेत्रालय के अनुभवी सर्जन एवं आधुनिक तकनीक की बदौलत केराटोकोनस के 11 साल के मरीज को नई रोशनी मिल सकी है। ये बात रतन ज्योति नेत्रालय के चेयरमैन डॉ. पुरेन्द्र भसीन ने कही। उन्होंने बताया कि ग्वालियर का 11 वर्षीय सुरजीत पिछले एक वर्ष से ब्लैकबोर्ड पर लिखे शब्दों को पढ़ नहीं पा रहा था। जब मरीज रंतन ज्योति नेत्रालय आया तो जांच में पता चला कि मरीज की दोनों आंखों में केराटोकोनस
है। इसके बाद तुरंत कॉर्नियल क्रॉस-लिंकिंग प्रक्रिया करने का निर्णय लिया। यह एक अत्याधुनिक और सुरक्षित तकनीक है जिसमें रिबोफ्लेविन ड्रॉप्स और यूवी लाइट की मदद से कॉर्निया के कोलेजन फाइबर को मजबूत किया जाता है। इस मौके पर संस्थान की मेडिकल डायरेक्टर डॉ. प्रियंवदा भसीन ने बताया कि ‘केराटोकोनस’ बीमारी बच्चों, किशोरों और युवाओं में तेजी से बढ़ रही है, जिसमें आंख की पारदर्शी बाहरी परत कॉर्निया धीरे-धीरे पतली होकर अपने सामान्य गोल आकार से विकृत होकर शंकु जैसी हो जाती है। इससे मरीज को धुंधला दिखाई देना, रोशनी के चारों ओर हैलो दिखना, रात में देखने में कठिनाई एवं चश्मे का नंबर बार-बार बदलना जैसी समस्याएं होने लगती हैं।