समाज के आखिरी छोर पर खडे व्यक्ति की सेवा के लिए तत्पर रहते थे। माधवराव सिंधिया 

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समाज के आखिरी छोर पर खडे व्यक्ति की सेवा के लिए तत्पर रहते थे। माधवराव सिंधिया 

माधवराव सिंधिया कुलीनवंश, व्यक्तिगत आर्कषण, युवा छवि और लोकतंत्र की उठा-पटक के बीच उनके व्यक्तित्व की क्षमता व जनसेवा के प्रति समर्पण ने उन्हें भारत के शीर्ष नेताओं के बीच जन लोकप्रिय नेता के रूप में स्थापित किया। 

पारंपरिक राजसी जीवन से हटकर जनता की सेवा को अपना ध्येय बनाने के साथ ही भारतीय राजनीति के उन प्रमुख लोगो में अपने आप भिन्न व्यक्तित्व से सैकड़ों लोगों के दिलों में वर्तमान तक जीवित जनसेवी व राजनेता के साथ ग्वालियर स्टेट के 11 वे शासक कैलाशवासी माधवराव सिंधिया का जन्म 10 मार्च 1945 को तत्कालीन ग्वालियर महाराजा व 21 तोपो की सलामी लेने वाले सर जीवाजीराव सिंधिया व राजमाता विजयाराजे सिंधिया के घर समुद्र महल तत्कालीन बम्बई व वर्तमान के मुम्बई में हुआ। 

 स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् देश में मौजूद विभिन्न रियासतो ने राजनीति में प्रवेश किया। किन्तु भारतीय लोकतंत्र में सामांजस्य न बैठा सके। किन्तु सिंधिया राजपरिवार से राजमाता विजयाराजे सिंधिया द्वारा 1957 से वर्तमान में सिंधिया परिवार के मुखिया ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राजनीति में अपना दबदबा बना कर रखा है। रियासत से सियासत की राह पर चलने वाले माधवराव सिंधिया की प्रारम्भिक शिक्षा सिंधिया स्कूल से प्राप्त की। तत्पश्चात् ऑक्सफोर्ड से उच्च शिक्षा हासिल कर मात्र 26 वर्ष की आयु में 1971 पहली बार गुना लोकसभा सीट से निर्वाचित होकर अपने राजनैतिक करियर की शुरूआत की। जिसके बाद वे 9 बार लोकसभा के लिए निर्वाचित होकर 30 दशक तक अपराजेय ससंद सदस्य रहे। जो उनके अजातशत्रु रहने का प्रमाण है। समय के साथ वे कांग्रेस का बड़ा चहरा बन गये। माधवराव सिंधिया अपनी वाकपटुता के चलते जनता को अपनी ओर आकर्षित कर लिया करते थे। 1984 में गांधी परिवार से नजदीकी पारिवारिक संबंध के चलते राजीव गांधी के कहने पर अपनी पारंपरिक सीट छोड़ ग्वालियर लोकसभा से पर्चा भरा और भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता अटल बिहारी वाजपेयी को लगभग  दो लाख  वोटो से हराया। 

उनकी कार्य शैली से पता चलता है कि वर्क कल्चर के पारदर्शी व्यक्तित्व के धनी थे. राजीव गांधी की सरकार में रेल मंत्री रहते हुए यात्रा यातायात में वृद्धि, शताब्दी की शुरूआत 1983-84 में 45 करोड़ के घाटे के विपरीत 1984-85 में 179 करोड़ का अधिशेष लाभ उनके कुशल नेतृत्व का प्रमाण है। 1991 में नागरिक उड्डयन व पर्यटन मंत्री रहते हुए हवाई अड्डों का आधुनिकीकरण तथा मॉडल हवाई अड्डों का निर्माण, एयर इंडिया का निजीकरण की योजना, खुला आकाश नीति आदि नवीन योजनाओं पर कार्य किया। साथ ही भारतीय पर्यटन को सशक्त रूप से खड़ा करने नई योजनाए बनाई व ग्वालियर में भारतीय पर्यटन व यात्रा प्रबंध संस्थान की स्थापना की।

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1995 में मानव संसाधन एवं विकास मंत्री की जिम्मेदारी संभालते हुए ‘‘शिक्षा के सार्वभौमिकरण‘‘, माध्यान भोजन कार्यक्रम, महिला समृद्धि योजना, राष्ट्रीय महिला कोष जैसी महत्वकांक्षी योजनाओ के साथ अल्पसंख्यको के शैक्षणिक विकास के लिए मदरसो के लिए आर्थिक सहायता, उच्च शिक्षा के लिए हैदराबाद में हिन्दी विश्वविद्यालय की स्थापना, ग्वालियर में एशिया का पहला राष्ट्रीय सूचना एवं प्रबंध संस्थान, इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट व एशिया के सबसे बड़े शारीरिक शिक्षा महाविद्यालय एलएनआपीई को समविश्वविद्यालय का दर्जा प्रदान किया।

माधवराव सिंधिया राजनेता के साथ-साथ बहुत बडे क्रिकेट प्रेमी भी रहे, क्रिकेट के प्रति लगाव को इस बात से ही समझा जा सकता है, कि क्रिकेट की विभिन्न प्रशासनिक बॉडी में अध्यक्ष व सदस्य रहे। जिनमे 1967 ग्वालियर डिवीजन क्रिकेट एसोसिएशन की स्थापना प्रमुख है, 1982-83 में वे मध्यप्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष बन मृत्युपर्यंत 19 वर्ष तक इस पद पर रहे। साथ ही माधवराव सिंधिया 1991-93 तक भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष रहे, उनके कार्यकाल के दौरान बीसीसीआई विश्व के सबसे धनी क्रिकेट संगठन में बदल गया। साथ ही वे 1996 में आयोजित विल्स विश्वकप क्रिकेट मैचों की समिति पिल्लकॉम के भी अध्यक्ष रहे।   

माधवराव सिंधिया समाज में उद्योग, खेलकूद, साहित्य, कला, संस्कृति, शिक्षा जैसे सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विकास तथा समाजिक संतुलन, धर्म निरपेक्ष एवं साम्प्रदायिक सद्भाव को मजबूत बनाये रखने के उददेश्य के लिए दृढ संकल्पित थे।

30 सितम्बर 2001 को उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव प्रचार के लिए माधवराव सिंधिया ने दिल्ली के सफदरजंग हवाई अड्डे से 11ः49 पर C90 विमान द्वारा कानपुर के जाते समय मैनपुरी के पास भैंसरौली गांव में विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में उनके साथ उनके निजि सचिव रूपेन्द्र सिंह, आजतक के पत्रकार रंजन झा, कैमरा मैन गोपाल बिष्ट, इंडियन एक्सप्रेस के संजीव सिन्हा, हिन्दुस्तान टाइम्स की पत्रकार अंजू शर्मा, पायलट व को पायलट विवेक गुप्ता व रितु मलिक सहित आठ लोग मौजूद थे। हादसे के बाद जांच के लिए सरकार द्वारा एक कमेटी भी बनाई गई पर विमान में ब्लैक बॉक्स न होने के कारण हादसे के कारणो का पता न चल सका। उनके मृत्युउपरांत ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने परिवार की राजनैतिक व जनसेवा की विरासत को बखूबी आगे बढ़ा रहे है। 

कैलाशवासी माधवराव सिंधिया का जीवन सिर्फ पद या विरासत से नहीं, बल्कि सत्यनिष्ठा, जनसेवा और लोकतंत्र के प्रति समर्पण से ही अपनी पहचान बनाने का संदेश देता है।

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