ग्वालियर में हवा ज़हरीली: AQI 300 पार, खतरनाक स्तर पर

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ग्वालियर में हवा ज़हरीली: AQI 300 पार, खतरनाक स्तर पर

ग्वालियर शहर में वायु प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है और हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 300 के पार पहुंच गया है। इसके कारण ग्वालियर प्रदेश के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल हो चुका है। प्रदेश में ग्वालियर से अधिक प्रदूषण केवल सिंगरौली में दर्ज किया गया है। खतरनाक स्तर तक पहुंच चुके प्रदूषण के बावजूद नगर निगम की कार्रवाई नगण्य है। न तो फव्वारे शुरू किए गए हैं और न ही सड़क की धूल साफ करने के लिए रोड स्वीपिंग मशीनें चलाई जा रही हैं। जबकि नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय पहले ही अधिकारियों को प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दे चुके हैं।

केंद्र सरकार का वायु गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम ठप

शहर की हवा साफ करने के लिए केंद्र सरकार ने पूरे प्रदेश में वायु गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम चलाया हुआ है। 26 नवंबर को प्रदेश के मुख्य सचिव ने सभी नगरीय निकायों के साथ बैठक कर बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर गंभीर चिंता जताई थी। इसके बाद नगर निगम आयुक्त ने शहर में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए कई निर्देश जारी किए थे और 30 नवंबर तक सभी उपाय लागू करने को कहा था। लेकिन 5 दिसंबर तक भी शहर में प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े कार्यों की शुरुआत नहीं हो सकी है। यह स्थिति नगर निगम की सुस्ती और लापरवाही को उजागर करती है।

निर्माण स्थलों पर बिखरा C&D वेस्ट बढ़ा रहा प्रदूषण

शहर में निर्माण कार्यों के दौरान निकलने वाला C&D (Construction & Demolition) वेस्ट बड़ी समस्या बना हुआ है। योजना यह थी कि निर्माण सामग्री का यह कचरा जलालपुर प्लांट तक पहुंचाकर उससे पेवर्स तैयार किए जाएं, लेकिन अधिकांश निर्माण स्थलों पर C&D वेस्ट यहीं पड़ा हुआ है। हवा के साथ उड़ने वाले इसके बारीक कण वातावरण में मिलकर प्रदूषण स्तर को और खतरनाक बना रहे हैं।

खराब पड़ी रोड स्वीपिंग मशीनें बनी बड़ी बाधा

नगर निगम के पास शहर की सड़कों की धूल साफ करने के लिए रोड स्वीपिंग मशीनें हैं, लेकिन उनमें से अधिकतर मशीनें खराब पड़ी हैं। परिणामस्वरूप शहर की धूल सड़कों पर जमती जा रही है और इससे हवा में धूलकणों की मात्रा लगातार बढ़ रही है। मशीनें चालू न होने की वजह से प्रदूषण नियंत्रण की सबसे जरूरी प्रक्रिया ही ठप पड़ी है।

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चौराहों और पार्कों में फव्वारे अभी भी बंद

आयुक्त संघ प्रिय ने पार्क अधीक्षक मुकेश बंसल को निर्देश दिए थे कि शहर के सभी पार्कों और प्रमुख चौराहों पर लगे फव्वारों को तत्काल संचालित किया जाए, ताकि हवा में नमी बढ़े और धूलकण कम हों। लेकिन इन निर्देशों के बावजूद फव्वारे आज तक शुरू नहीं किए गए। यह नगर निगम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

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