उत्तर प्रदेश में छह साल से स्थिर चल रही बिजली दरों में अब बढ़ोतरी की पूरी संभावना बन गई है। राज्य के पावर कॉरपोरेशन ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई टैरिफ संरचना की तैयारी करते हुए विद्युत नियामक आयोग में वार्षिक राजस्व आवश्यकता का प्रस्ताव जमा कर दिया है। इस प्रस्ताव में करीब 1.25 लाख करोड़ रुपये का एआरआर और लगभग 14 हजार करोड़ रुपये का राजस्व गैप दिखाया गया है। यदि आयोग इस गैप को मान्य कर लेता है, तो अगले वर्ष बिजली 16% तक महंगी हो सकती है।
बिजली महंगी क्यों हो सकती है?
पावर कॉरपोरेशन के अनुसार राज्य में बढ़ती लागत, लाइन लॉस, और ऊर्जा खरीद की महंगी कीमतों ने राजस्व घाटा बढ़ाया है। इसी घाटे को पूरा करने के लिए टैरिफ संशोधन की जरूरत जताई जा रही है। वर्तमान में राज्य सरकार ने दरों को छह वर्षों से स्थिर रखा है, लेकिन अब निगम का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में बढ़ोतरी अनिवार्य होती जा रही है।
चुनावी वर्ष में बढ़ोतरी की चर्चा
दिलचस्प बात यह है कि उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष पंचायत चुनाव और 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे समय में सरकार आम जनता पर अतिरिक्त बोझ डालने से बच सकती है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि चुनावी माहौल में बिजली के दाम बढ़ाना सरकार के लिए जोखिम भरा कदम होगा। इसके बावजूद पावर कॉरपोरेशन ने नियमानुसार तय समय से पहले ही अपना प्रस्ताव आयोग में जमा कर दिया है।
आगे क्या?
अब विद्युत नियामक आयोग प्रस्ताव की जांच करेगा । जिसमे सार्वजनिक सुनवाई के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यदि प्रस्ताव पास हुआ, तो घरेलू से लेकर औद्योगिक उपभोक्ताओं तक सभी पर बढ़ोतरी का असर पड़ेगा।