भोपाल। सिर्फ भाजपा को देखकर संघ के बारे में कोई विचार न बनाएं, संघ किसी का रिमोट कंट्रोल नहीं है। अब समय आ गया है हिंदू शक्ति के रूप में आए, जो हिंदू भटक गए हैं उन्हें साथ लेकर आए। यह परामर्श संघ प्रमुख मोहन भागवत ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक के सौ वर्ष पूर्ण होने षर भोपाल में आयोजित संगोष्ठी में दिया।
उन्होंने भाषा विवाद पर भी अपनी राय रखते हुए कहा कि जिस राज्य में रहते हैं वहां की भाषा आनी चाहिए। तीन भाषा आना चाहिए- एक राज्य, एक देश और एक दुनिया की भाषा। हमें चीन से सीखना चाहिए कि बड़ा राष्ट्र कैसे बनाया जाता है।
सरसंघचालक मोहन भागवत ने भोपाल के रविंद्र भवन में आयोजित प्रबुद्ध सम्मेलन में भी अपने विचार रखे। उन्होंने संघ के विचार, कार्यपद्धति और भविष्य के लक्ष्यों पर विस्तार से चर्चा की।
संघ के शताब्दी वर्ष (सौ साल पूरे होने) के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आम लोगों तक संघ की सही तस्वीर पहुंचाना था। अपने संबोधन में उन्होंने हिंदुत्व की परिभाषा से लेकर भाजपा और विहिप जैसे संगठनों के साथ संघ के रिश्तों पर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अगर आप बीजेपी, वीएचपी या विद्या भारती को देखकर संघ को समझने की कोशिश करेंगे तो आप संघ को कभी नहीं समझ पाएंगे। भागवत ने स्पष्ट किया कि संघ का काम सिर्फ स्वयंसेवक तैयार करना है। संघ उन्हें विचार, संस्कार और लक्ष्य देता है। इसके बाद स्वयंसेवक समाज के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर काम करते हैं। भाजपा या विहिप के काम करने का तरीका अलग है, वे अपना काम स्वतंत्र रूप से करते हैं। संघ ने उन्हें सिर्फ संस्कार दिया है, लेकिन उनके कार्यों से संघ को परिभाषित नहीं किया जा सकता।
मोहन भागवत ने हिंदुत्व की व्याख्या करते हुए स्पष्ट किया कि हिंदू कोई जाति नहीं है, बल्कि यह विभिन्न समाजों की एक जैसी मनोवृत्ति और स्वभाव है। हिंदू नाम इसलिए दिया गया क्योंकि हम सभी पंथों और संप्रदायों को मानते हैं और उनका सम्मान करते हैं। हिंदू, हिंदवी और भारत ये तीनों एक ही हैं। हिंदू कहने से हम सब एक सूत्र में बंधते हैं। यह केवल एक धर्म नहीं बल्कि भारत का मूल स्वभाव है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संघ का विचार कोई अलग या नया विचार नहीं है, बल्कि यह सनातन काल से चला आरहा विचार है, जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है।
संघ के संघर्षों को याद करते हुए भागवत ने कहा कि दुनिया मे शायद ही किसी संगठन का इतना विरोध हुआ हो, जितना आरएसएस का हुआ है। संघ के खिलाफ दुष्प्रचार किया गया, हत्याएं हुईं लेकिन स्वयंसेवकों ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने संघ की आर्थिक शुचिता पर बात करते हुए कहा कि संघ कभी किसी से.चंदा नहीं मांगता। यह संगठन पूरी तरह से स्वयंसेवकों द्वारा दी गई गुरुदक्षिणा से संचालित होता है।