ग्वालियर । बागेश्वर पीठाधीश्वर स्वामी धीरेंद्र शास्त्री आज ग्वालियर पहुंचे और पत्रकारों से बात करते हुए कई संवेदनशील विषयों पर तीखे तेवर दिखाए। उनकी टिप्पणियों में भगवान राम के अपमान से जुड़े हालिया घटनाक्रम, बागेश्वर धाम में VVIP व्यवस्थाओं में बदलाव और पाकिस्तान-प्रशासित कश्मीर (PoK) को लेकर विरोधी रुख प्रमुख रहे।
धीरेंद्र शास्त्री ने तमिलनाडु में कथित रूप से राम के चित्र जलाए जाने संबंधी मामले का ज़िक्र करते हुए कहा कि “राम के राष्ट्र में यह रावण के खानदान के लोग हैं” और ऐसे लोगों पर वहां की सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कथित आरोपियों के लिए सख्त सज़ा की माँग जताते हुए कहा, “उन लोगों को तो फांसी देना चाहिए, हम यह भगवान से प्रार्थना करते हैं।” ये बयान सीधे और कटु भाषा में व्यक्त किए गए हैं।
ध्यान देने योग्य है कि सार्वजनिक मंच पर किसी समुदाय या व्यक्ति के खिलाफ हिंसा की मांग संवेदनशील और विवादास्पद मानी जाती है। समाचार रिपोर्ट के रूप में यह उल्लेख करना ज़रूरी है कि ये उनके व्यक्तिकृत विचार हैं और इन बयानों से समाज में भावनात्मक प्रतिक्रिया तथा कानूनी व सार्वजनिक चर्चा पैदा होने की संभावना है।
बागेश्वर धाम में VVIP नीति पर बदलाव
धाम में वीआईपी संस्कृति को लेकर पूछे गए सवाल पर धीरेंद्र शास्त्री ने बताया कि सन्यासी बाबा ने उन्हें स्वप्न में निर्देश दिया कि सबसे पहले धाम आने वाले साधारण भक्तों से मिलना चाहिए। इसके बाद उन्होंने कहा कि VVIP/विशिष्ट अतिथियों को कम से कम एक दिन का समय लेकर आने के बाद ही उनसे मिलने का प्रावधान किया जाएगा — जिसका उद्देश्य साधारण भक्तों और पारंपरिक आराध्य अनुभव को प्राथमिकता देना बताया गया।
“आई लव मोहम्मद” और धार्मिक भावनाओं पर टिप्पणी
एक और विषय पर उन्होंने कहा कि “आई लव मोहम्मद” या “आई लव महाकाल” जैसी अभिव्यक्तियाँ स्वयं में बुरी नहीं, परन्तु किसी भी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना सहन नहीं किया जाएगा। साथ ही उनके कथन के स्वर में कड़ा रुख था कि धार्मिक अपमान सहन नहीं किया जाएगा; हालांकि उन्होंने शाब्दिक शब्दों में भी तीव्रता बरती।
PoK व पाकिस्तान को लेकर बयान
PoK और पाकिस्तान के हालात पर बोलते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि “हम अपनी जमीन लेकर रहेंगे” और पाकिस्तान में व्याप्त हालिया घटनाओं का उल्लेख करते हुए वहां शांति की कामना की। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान की स्थिति ठीक नहीं है तो लोग भारत वापस लौट आएं — यह संदेश भी उन्होंने अपनी भाषा में रखा।