राजधानी दिल्ली के गांधी विहार इलाके में कुछ हफ्ते पहले लगी आग का सच जब सामने आया, तो पुलिस भी सन्न रह गई। जिस घटना को अब तक “गैस लीक हादसा” या “शॉर्ट सर्किट” समझा जा रहा था, वह दरअसल एक “साइंटिफिक मर्डर” का केस निकला — और इस पूरी साजिश की मास्टरमाइंड कोई पेशेवर अपराधी नहीं, बल्कि फॉरेंसिक साइंस की एक छात्रा थी।
यह हत्या इतनी सूझबूझ और वैज्ञानिक तरीके से की गई थी कि शुरुआती जांच में हर सुराग “एक दुर्घटना” की ओर ही इशारा कर रहा था। लेकिन, तकनीक के उस छोटे से अंश — मोबाइल डेटा और सीसीटीवी फुटेज — ने आखिरकार पूरी कहानी पलट दी।
अक्टूबर की सुबह — जब हादसे का भ्रम टूटा
6 अक्टूबर 2025 की सुबह गांधी विहार के एक चारमंज़िला मकान से धुआं उठता देखा गया। आसपास के लोगों ने फायर ब्रिगेड को बुलाया। दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पाया तो कमरे के अंदर एक झुलसा हुआ शव मिला। पहचान हुई — मृतक का नाम रामकेश मीना (32) था। वह राजस्थान का रहने वाला था और दिल्ली में रहकर यूपीएससी की तैयारी कर रहा था। शुरुआती तौर पर पुलिस ने इसे सिलेंडर लीक या शॉर्ट सर्किट से हुआ हादसा मानकर फाइल बंद करने की तैयारी शुरू कर दी थी। लेकिन कमरे का मंजर कुछ और कहानी कह रहा था — किताबें जली थीं, लेकिन सिलेंडर ठीक था। बिस्तर आधा सुलगा हुआ था, और खिड़की से निकलने वाला धुआं किसी रासायनिक पदार्थ से उत्पन्न लग रहा था। यही से जांच की दिशा बदल गई।
साइंटिफिक मर्डर
जब एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैब) की टीम मौके पर पहुंची, तो उन्हें कमरे में कुछ असामान्य केमिकल ट्रेस मिले — जिनमें एक फ्लेम एक्सेलरेटर और एथेनॉल के मिश्रण के निशान थे। यह किसी सामान्य आग से उत्पन्न नहीं हो सकता था। वहीं मृतक के मोबाइल की कॉल डिटेल्स और कमरे के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज ने जांचकर्ताओं को चौका दिया। फुटेज में घटना से कुछ घंटे पहले एक लड़की को उसी बिल्डिंग में जाते और आधे घंटे बाद बाहर निकलते देखा गया। पुलिस ने जांच की तो पता चला — वह लड़की फॉरेंसिक साइंस की छात्रा थी और रामकेश की जान-पहचान में थी।
‘लेडी किलर’ की चाल — एक परफेक्ट प्लान
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी छात्रा ने यह पूरी साजिश ठंडे दिमाग से रची थी। उसने फॉरेंसिक थ्योरी और केमिकल नॉलेज का इस्तेमाल कर एक ऐसा “हादसा” क्रिएट किया जो बाहर से देखने में पूरी तरह असली लगे। जांच में खुलासा हुआ कि दोनों के बीच किसी निजी विवाद को लेकर झगड़ा हुआ था। छात्रा ने पहले मीना को बेहोश करने वाला पदार्थ दिया और फिर कमरे में ज्वलनशील मिश्रण छिड़ककर आग लगा दी। आग फैलने के बाद उसने दरवाज़ा बाहर से बंद किया और सुनिश्चित किया कि आग धीरे-धीरे कमरे में फैले ताकि धमाका न हो, बल्कि दम घुटने से मौत हो। यही वजह थी कि शुरुआती जांच में इसे सामान्य आग माना गया।
मोबाइल डेटा और सीसीटीवी ने तोड़ी चुप्पी
जांच के दौरान पुलिस ने मृतक के मोबाइल की लोकेशन हिस्ट्री और मैसेज रिकॉर्ड खंगाले। उसमें छात्रा के साथ आखिरी बातचीत दर्ज थी। साथ ही सीसीटीवी में उसके आने-जाने के फुटेज ने सारी कहानी उजागर कर दी। छात्रा को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो उसने आखिरकार अपराध कबूल लिया। उसने कहा कि वह “फॉरेंसिक प्रोजेक्ट” की वजह से कई बार आग से संबंधित प्रयोग करती थी और उसे लगा कि इस तरीके से वह एक “परफेक्ट क्राइम” कर सकती है।
पुलिस की कार्रवाई और केस की मौजूदा स्थिति
फिलहाल छात्रा को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस ने उसके कॉलेज और दोस्तों से भी पूछताछ शुरू की है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसे इस स्तर तक जाने की प्रेरणा कहाँ से मिली। अधिकारियों ने कहा कि यह केस केवल हत्या नहीं, बल्कि “ज्ञान के दुरुपयोग” का चौंकाने वाला उदाहरण है — जहां विज्ञान को अपराध के हथियार की तरह इस्तेमाल किया गया।