न्याय समानता और स्वंतत्रता का संकल्प संविधान दिवस। 

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न्याय समानता और स्वंतत्रता का संकल्प संविधान दिवस। 

संविधान तभी जीवित रहता है जब नागरिक जागरूक हो, संविधान नागरिकों कों मतदान का अधिकार कानून का पालन, लोकतंत्र संवाद में सहभागिता ,सामाजिक एकता, समानता का अधिकार देता हैं।

6 नवम्बर का दिन भारतीय लोकतंत्र में दिन विशेष महत्व रखता है। आज के दिन पूरे देश में संविधान दिवस या कानून दिवस के रूप में मनाया जाता हैं। भारत सरकार द्वारा डाॅ. भीमराव अम्बेडकर की 125 वी जयंती पर 2015 से 26 नवम्वर के दिन को संविधान दिवस व कानून दिवस मनाने की घोषणा की गई।

संविधान दिवस संकल्प, संघर्ष और दूरदर्शिता के प्रतीक के साथ-साथ भारत को एक स्वतंत्र, समानता पूर्ण, बहुलतावाद और संवैधानिक लोकतंत्र राष्ट्र के रूप में  विश्व पटल पर स्थापित करता है।  साथ ही स्वतंत्रता ,समानता, बंधुता और न्याय के मूल्यों की हर नागरिक के अंदर कर्तव्य का बोध जागाता है व उन मूल्यों की वकालत भी करता है। जो किसी व्यक्ति को प्रजातंत्र में बिना किसी भेदभाव के सुरक्षा, समान अवसर व सम्मान के साथ जीने की सम्भावना देते है।

आजादी से पूर्व भारत अंग्रेजो द्वारा बनाए गए विभिन्न अधिनियम द्वारा शासित होता रहा। जिनमें से ब्रिटिश संसद द्वारा पारित भारत शासन अधिनियम 1935 प्रमुख है, क्योकि इस अधिनियम की छाप भारतीय संविधान में देखने को मिलती है। 1935 के अधिनियम से भारतीय संविधान में प्रांतीय स्वायत्ता और संघीय शासन की आवधारण शामिल की गई है। समय के साथ भारत की आजादी के लिए प्रयासरत आंदोलनकरीयों व जनता द्वारा भारतीय संविधान की मांग ब्रिटिश सरकार के सामने समय-समय पर रखी गई, जिसे  अंग्रेजो द्वारा 1940 में स्वीकार किया गया। वर्ष 1946 में ब्रिटिश सरकार द्वारा भारतीय नेताओं कों सत्ता हस्तांतरण व स्वतंत्र भारत की नवीन शासन व्यवस्था को चलाने के लिए भविष्य में बनने वाले संविधान पर चर्चा के लिए तीन सदस्यी कैबिनेट मिशन मार्च 1946 को भारत आया। कैबिनेट मिशन का उददेश्य सत्ता हस्तातरण के पश्चात् भारत की शासन व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने व भारतीय समाज की विविधता को संतुलित रखने के उददेश्य से 6 दिसम्बर 1946 को संविधान सभा का गठन हुआ। जिसकी पहली बैठक 9 दिसम्वर 1946 को संसद भवन के सेंट्रल हॉल में आयोजित हुई। इस बैठक में 211 सदस्यों भाग लिया। अलग पाकिस्तान बनाने की मांग के चलते मुलस्लिम लीग ने इस बैठक का बहिष्कार कर दिया। बैठक के वरिष्ठतम सदस्य डॉ़ सचिदानन्द सिन्हा अस्थाई अध्यक्ष व बीएन राव को सलाहाकार बने। तथा बाद में डा़ॅ राजेन्द्र प्रसाद को अध्यक्ष चुना गया व डॉ. एचसी मुखर्जी , टी टी कृष्णमाचारी उपाध्यक्ष बने। 

13 दिसम्बर को पं जवाहरलाल नेहरू ने उददेश्य प्रस्ताव प्रस्ताव प्रस्तुत किया।  जिसे 22 जनवरी 1947 को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया। संविधान सभा में कुल सदस्य संख्या 389 थी।  विभाजन के बाद यह संख्या 299 रह गई । जिसमें 229 सदस्य प्रांत से 70 देशी रियासत से मौजूद थे। जवाहरलाल  नेहरू डॉ. भीमराव अम्बेडकर, सरदार वल्लभ भाई पटेल मौलाना अब्दुल कलाम आजाद प्रमुख सदस्य थे। संविधान सभा मे सरोजनी नायडू, सुचेता कृपलानी, विजयलक्ष्मी पंडित, लीला रॉय, दुर्गाबाई देशमुख, दक्षायनी वेलायुधन, बेगम कुदसिया सहित 15 महिलाए शामिल थी। संविधान निर्माण में दो वर्ष 11 माह 18 दिन का समय लगा। साथ ही 63,96,729 रूपये का खर्च आया। संविधान का निर्माण कार्य इतना विस्तृत था कि इसके लिए 8 प्रमुख समितियो का गठन किया गया। जिनमें प्रारूप समिति, संघ शक्ति समिति, संघीय संविधान समिति, प्रांतीय संविधान समिति, मूल अधिकार समिति, सभा समिति, भाषा समिति प्रमुख थी। साथ ही 13 अन्य छोटी समितियॉ भी गठित की गई। देश के पहले कानून मंत्री डॉ भीमराव अम्बेडकर की अध्यक्षता मे 29 अगस्त 1947 को गठित की गई प्रारूप समिति का प्रमुख कार्य भारतीय संविधान का मसौदा तैयार करना था। इस समिति में एन गोपालस्वामी अयंगर, केएम मुंशी व एन माधवराव सहित 6 सदस्य शामिल थे।

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 भारतीय संविधान के निर्माण में लगभग 60 देशों के संविधान को पढ़ा गया, तत्पश्चात् विभिन्न देशों के संविधान से प्रमुख प्रावधान लिए गये। जिनमें से अमेरिका से मौलिक अधिकारी, न्यायिक स्वंतत्रता, संविधान को सर्वोच्चता, निर्वाचित राष्ट्रपति व महाभियोग ब्रिटेन से संसदीय प्रणाली, एकल नागरिकता विधि निर्माण प्रक्रिया, दक्षिण अफ्रिका से संविधान संशोधन, फ्रांस से गणराज्य व्यवस्था, समानता और बंधुत्व,ऑस्ट्रेलिया से प्रस्तावना, कनाडा से संघीय कार्यप्रणाली केन्द्र की विशेष शक्तियाँ, जर्मनी से आपातकाल, रूस से मौलिक कर्तव्य के साथ अलग-अलग देशों से विभिन्न प्रावधान लिए गए।

165 दिन चली बैठक में 7,653 से अधिक संशोधन के प्रस्ताव आए जिसमें सें 2473 (लगभग दो हजार) संशोधन का स्वीकार कर लिये गये। संविधान का अंतिम प्रारूप 4 नवम्वर 1948 को पढ़ा गया जो 5 दिन 9 नवम्वर तक चला। 26 नवम्बर 1949 को संविधान सभा के 299 में से 284 सदस्यों ने

हस्ताक्षर कर आत्मर्पित किया। 26 नवम्वर को निर्मित संविधान में प्रस्तावना सहित 22 भाग 395 अनुच्छेद व 8 अनुसूचियाँ थी। जिन्हें समय के साथ देश की आवश्यकतानुसार संशेधित किया गया। भारतीय संविधान में पहला संशोधन 1951 में नौवी अनुसूची जोड़ कर किया गया। अभी तक किया गया सबसे बड़ा संविधान संशोधन 1976 में किया गया 42वां संविधान संशोधन है। जिसे लघु संविधान भी कहा जाता है। हाल ही में 106 वां संविधान संशोधन अधिनियम पारित किया गया। जिसमें लोकसभा व विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। भारतीय संविधान केवल कानूनों का संग्रह नहीं बल्कि सामाजिक, राजीनतिक दर्शन भी है। जिसमें संवाद और सहमति को लोकतांत्रिक आधिकार मानना, न्याय व समनाता की सर्वोच्चता, कानून के शासन को नागरिक भावना से उपर मानना है।

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