ग्वालियर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां जिला अस्पताल मुरार में बच्चों के एंटीबायोटिक सिरप में कीड़े जैसी चीज़ मिलने की शिकायत की गई। जानकारी के मुताबिक, एक महिला अपने बच्चे को दिखाने के लिए जिला अस्पताल के पीडियाट्रिक विभाग में पहुंची थी। डॉक्टरों ने उसे अजिथ्रोमाइसिन सिरप दिया था, जिसकी एक्सपायरी डेट वर्ष 2027 की है। दो दिन बाद महिला उसी सिरप की खुली बोतल लेकर अस्पताल पहुंची और शिकायत की कि सिरप के अंदर कीड़े जैसी वस्तु दिखाई दे रही है।
जिला अस्पताल ने तुंरत रोकी सिरप की सप्लाई
शिकायत सामने आने के बाद जिला अस्पताल प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अजिथ्रोमाइसिन सिरप के वितरण पर रोक लगा दी ,यह सिरप भोपाल से जिला अस्पताल मुरार में सप्लाई किया गया था। बताया गया कि अस्पताल के स्टॉक में इस सिरप की करीब 316 बोतलें मौजूद हैं। एहतियातन सभी बोतलों की जांच कराने का निर्णय लिया गया। इसके बाद ड्रग डिपार्टमेंट की टीम को मौके पर बुलाया गया और सिरप के सैंपल लिए गए।
ड्रग विभाग की टीम ने की जांच
ड्रग डिपार्टमेंट की टीम ने मौके पर 10 अजिथ्रोमाइसिन सिरप की शीशियों की जांच की। प्रारंभिक जांच में किसी भी बोतल में कीड़े जैसी वस्तु नहीं मिली।
फिर भी सुरक्षा और गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए विभाग ने 10 सिरप की शीशियों के सैंपल एकत्र किए हैं, जिन्हें अब कोलकाता की लेबोरेटरी में भेजा जाएगा, ताकि वैज्ञानिक जांच की जा सके और सच्चाई सामने आ सके।
CMHO ने दी सफाई: “सिरप में कीड़ा नहीं, ब्लैक पार्टिकल था”
इस पूरे मामले पर ग्वालियर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. सचिन श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि प्रारंभिक जांच में सिरप में कीड़े जैसी चीज नहीं, बल्कि ब्लैक पार्टिकल पाया गया है।
“जिला अस्पताल के सिविल सर्जन स्टोर में अजिथ्रोमाइसिन सिरप की शीशी में कीड़े की शिकायत की गई थी। लेकिन जांच में पाया गया कि वह कीड़ा नहीं बल्कि ब्लैक पार्टिकल था। ड्रग इंस्पेक्टर ने सभी बोतलों की जांच की और उनमें कोई कीड़े नहीं मिले। फिर भी एहतियात के तौर पर सैंपल लिए गए हैं,” — डॉ. सचिन श्रीवास्तव, CMHO ग्वालियर।
CMHO ने आगे बताया कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए भोपाल से भी एक विशेषज्ञ टीम ग्वालियर आएगी और जांच करेगी।
भोपाल से आई सप्लाई पर उठे सवाल
इस घटना के बाद भोपाल से की गई दवा सप्लाई पर भी सवाल उठने लगे हैं। अजिथ्रोमाइसिन सिरप सरकारी सप्लाई के तहत जिला अस्पताल में भेजा गया था। अब ड्रग विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि सप्लाई चेन के किस स्तर पर सिरप की क्वालिटी पर असर पड़ा और क्या अन्य जिलों में भी इसी बैच की दवा भेजी गई थी या नहीं।
जांच रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल अजिथ्रोमाइसिन सिरप के सैंपल कोलकाता की लैब में भेज दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि सिरप में वाकई कोई कीटाणु या खराबी थी या यह केवल दृश्य भ्रम था। जिला अस्पताल प्रशासन ने तब तक के लिए सिरप का उपयोग पूरी तरह निलंबित कर दिया है और स्टॉक को सुरक्षित रूप से अलग रख दिया गया है।