रविवार की रात लगने वाला चंद्रग्रहण भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में दिखाई देगा। यह अनोखी खगोलीय घटना केवल विज्ञान का विषय नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं से भी गहराई से जुड़ी है। अलग-अलग सभ्यताओं ने चंद्रग्रहण को अपनी-अपनी मान्यताओं और कहानियों से जोड़ा है।
भारतीय परंपरा
सनातन मान्यता के अनुसार चंद्रग्रहण राहु-केतु की कथा से जुड़ा है। माना जाता है कि स्वरभानु नामक राक्षस का सिर राहु बनकर चंद्रमा को निगलता है, जिससे ग्रहण लगता है। इस दौरान शुभ कार्य और पूजा-पाठ नहीं किए जाते और खासकर गर्भवती महिलाओं को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
चीन की मान्यता
प्राचीन चीन में चंद्रग्रहण को सम्राट के भविष्य से जोड़कर देखा जाता था। वहां यह मान्यता थी कि एक विशाल ड्रैगन चंद्रमा को निगल जाता है। ग्रहण के समय लोग ढोल-नगाड़े बजाते ताकि ड्रैगन डरकर चंद्रमा को छोड़ दे।
दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका
इंका सभ्यता में सूर्यग्रहण देवता के क्रोध का प्रतीक माना जाता था और इसे शांत करने के लिए बलि दी जाती थी।
- अमेरिका की ओजिब्वा जनजाति में चंद्रग्रहण आत्माओं की चेतावनी और असंतुलन का संकेत समझा जाता था।
- पश्चिम अफ्रीका (टोगो-बेनिन) में ग्रहण को सूर्य और चंद्रमा का आपसी झगड़ा माना जाता था। इस समय लोग आपसी मतभेद खत्म कर शांति स्थापित करने का प्रयास करते थे।