सीडीएस जनरल अनिल चौहान बोले—”भारत के युवाओं के रक्त में है क्रिएटिविटी”; कहा, अब युद्ध की परिभाषा बदल चुकी है

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सीडीएस जनरल अनिल चौहान बोले—"भारत के युवाओं के रक्त में है क्रिएटिविटी"; कहा, अब युद्ध की परिभाषा बदल चुकी है

ग्वालियर में सोमवार को आयोजित सिंधिया बॉयज स्कूल फोर्ट के 128वें स्थापना दिवस समारोह में देश के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। इस दौरान उन्होंने भारतीय युवाओं की प्रतिभा और रचनात्मक सोच की सराहना करते हुए कहा कि “भारत के युवाओं के रक्त में ही क्रिएटिविटी बहती है। इसके पीछे दो कारण हैं — तीव्र स्मरण शक्ति और मजबूत तर्कशक्ति। यह हमारी वेद-पुराणों की देन है, जो आत्मशक्ति का प्रमुख स्रोत हैं।”

“युद्ध की परिभाषा बदल चुकी है”

सीडीएस जनरल चौहान ने कहा कि आधुनिक युग में युद्ध का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है। पहले किसी देश की जीत-हार इस बात पर निर्भर करती थी कि सीमाओं पर कितने सैनिक मारे गए और कितना नुकसान हुआ। लेकिन अब ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने इन पारंपरिक मानकों को बदल दिया है।

उन्होंने कहा, “अब युद्ध में जीत का नया आधार स्थिरता, गति, सटीक रणनीति और सभी मोर्चों पर एकसाथ कार्रवाई की क्षमता है।” जनरल चौहान ने छात्रों से कहा कि वे आज नहीं, बल्कि आने वाले कल का भविष्य हैं, इसलिए उन्हें आधुनिक तकनीक और रणनीतिक सोच से खुद को सशक्त बनाना चाहिए।

छात्रों ने गीत से किया स्वागत

कार्यक्रम के शुभारंभ पर स्कूल के छात्रों ने “हिंदुस्तान मेरी जान…” गीत प्रस्तुत कर सीडीएस जनरल चौहान का स्वागत किया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री और स्कूल बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरमैन ज्योतिरादित्य सिंधिया भी मौजूद रहे। उन्होंने जनरल चौहान का स्वागत किया और स्कूल परिसर में आयोजित प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इसके बाद स्कूल के ब्रास बैंड ने ‘महाशंखनाद’ की धुन पर स्वागत संगीत प्रस्तुत किया। स्कूल के प्राचार्य अजय मिश्रा ने इस मौके पर स्कूल की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। समारोह में शिक्षक, पूर्व छात्र (2000 और 2015 बैच), वर्तमान विद्यार्थी और अभिभावक बड़ी संख्या में शामिल हुए।

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“राजनेता, नौकरशाह और सैनिक की सोच अलग होती है”

अपने संबोधन में जनरल अनिल चौहान ने लेफ्टिनेंट जनरल सिन्हा का उदाहरण देते हुए राजनेता, नौकरशाह और सैनिक के सोचने के तरीकों को हास्यपूर्ण अंदाज में समझाया। उन्होंने कहा,

“जब कोई राजनेता ‘हां’ कहता है तो उसका मतलब ‘शायद’ होता है,

‘शायद’ कहे तो ‘ना’,

और अगर ‘ना’ कहे तो वह अच्छा राजनेता नहीं है।”

“जब नौकरशाह ‘ना’ कहे तो उसका मतलब ‘शायद’,

‘शायद’ कहे तो ‘हां’ होता है,

और अगर वह तुरंत ‘हां’ कह दे, तो वह अच्छा नौकरशाह नहीं।”

“लेकिन जब सैनिक ‘ना’ कहता है तो उसका मतलब सचमुच ‘ना’ होता है,

और जब वह ‘हां’ कहता है तो हर हाल में उस पर कायम रहता है।”

उन्होंने कहा कि यही स्पष्टता और प्रतिबद्धता भारतीय सेना की सबसे बड़ी ताकत है, जो देश की सुरक्षा और स्थिरता की नींव है।

विदेश सचिव विक्रम मिश्री को मिला माधव अवॉर्ड

कार्यक्रम के दौरान इस वर्ष का ‘माधव पुरस्कार’ भारत के विदेश सचिव विक्रम मिश्री को प्रदान किया गया। मिश्री ने पुरस्कार ग्रहण करते हुए अपने केमिस्ट्री शिक्षक तेज सिंह इंगले को याद किया। उन्होंने बताया कि “दसवीं कक्षा में जब मैं केमिस्ट्री में असफल हुआ, तो मेरे शिक्षक ने मुझमें आत्मविश्वास जगाया और कहा कि और मेहनत करो। उसी प्रेरणा ने मुझे जीवनभर कठिन परिस्थितियों में मजबूत बने रहने की सीख दी।”

समापन

सिंधिया बॉयज स्कूल के स्थापना दिवस समारोह ने न केवल शिक्षा, अनुशासन और देशभक्ति का संगम दिखाया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि नया भारत ज्ञान, नवाचार और आत्मबल से ही विश्व में अग्रणी बनेगा। सीडीएस जनरल चौहान का यह प्रेरणादायक संबोधन युवाओं में राष्ट्र निर्माण के प्रति नए उत्साह और जिम्मेदारी की भावना भर गया।

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