सिंधु जल निलंबन के बाद मोदी सरकार का बड़ा कदम चिनाब प्रोजेक्ट की बढ़ाई रफ्तार

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सिंधु जल निलंबन के बाद मोदी सरकार का बड़ा कदम चिनाब प्रोजेक्ट की बढ़ाई रफ्तार

निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश

दिल्ली। ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने चिनाब वैली पावर प्रोजेक्ट्स(सीवीपीपी) के तहत निर्माणाधीन पाकल दुल(1000 मेगावाट) किरु(624 मेगावाट) और क्वार(540 मेगावाट) का निरीक्षण किया और निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। अधिकारियों का कहना है कि परियोजनाओं के पूरा हो जाने पर क्षेत्रीय बिजली आपूर्ति मजबूत होगी और जम्मू-कश्मीर के आर्थिक विकास में मदद मिलेगी

पाकिस्तान को बेदम करने के लिए बड़ा कदम

भारत सरकार ने सिंधु जल संधि को निलंबित रखने के फैसले के बाद अब पाकिस्तान को बेदम करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर की चिनाब घाटी में बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं के विकास को तेज कर दिया है। सरकार का कहना है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और पाकिस्तान को मिलने वाले फायदे को रोकने के लिए अपने पानी के हिस्से का पूरा इस्तेमाल करना चाहता है। अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय ऊर्जा मंत्री ने अपने दो दिवसीय दौरे के दौरान परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के प्रयासों पर जोर दिया। मंत्री ने चिनाब और उसके सहायक नदियों पर चल रही प्रमुख परियोजनाओं सालाल, सवालकोट, रतले तथा चिनाब वैली पावर प्रोजेक्ट्स द्वारा संचालित योजनाओं की समीक्षा की।

अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय ऊर्जा मंत्री खट्टर ने निर्माणाधीन तीन बड़े प्रोजेक्ट्स की प्रगति को भी देखा। ये परियोजनाएं न केवल बिजली उत्पादन बल्कि चिनाब बेसिन में जल नियंत्रण के लिए अहम हैं
एन एच पी सी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर ने ऊर्जा मंत्री को टेक्निकल प्रोग्रेस और निर्माण संबंधी चुनौतियों के बारे में भी जानकारी दी, जिसके बाद काम में तेजी लाने के निर्देश जारी किए और कहा कि संशोधित समय सीमा का सख्ती से पालन हो। पाकल, दुल और किरु जल विद्युत परियोजनाओं को दिसंबर 2026 तक चालू किया जाना है , जबकि क्वार परियोजना मार्च 2028 तक पूरी होनी है। अधिकारियों ने कहा पहले भौगोलिक चुनौतियों, पर्यावरण संबंधी मंजूरी और सुरक्षा चिंताओं के कारण देरी हुई थी।

सिंधु जल संधि निलंबन से मिली गति

सिंधु जल संधि निलंबन को जारी रखने से जम्मू-कश्मीर में जल विद्युत विकास को नई गति मिली है। भारत हमेशा कहता रहा है कि उसकी परियोजनाएं संधि के प्रावधानों का पूरी तरह पालन करती हैं, लेकिन नीति निर्माताओं का मानना है कि संधि ने पश्चिमी नदियों- सिंधु, झेलम और चिनाब के जल के इस्तेमाल पर अनुचित प्रतिबंध लगाए थे,जबकि ये नदियां भारतीय क्षेत्र से ही निकलती हैं।
अब जल संधि प्रभावी रूप से स्थापित होने से भारत रन-ऑफ- द- रिवर जल विद्युत क्षमता का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करने, क्षेत्रीय बिजली आपूर्ति मजबूत करने और राष्ट्रीय हित में जल संसाधनों का उपयोग करने पर ध्यान केन्द्रित कर रहा है।

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स्थानीय लोगों से भी बातचीत

परियोजना समीक्षा के अलावा मंत्री ने विभिन्न साइटों पर स्थानीय निवासियों, इंजीनियरों और मजदूरों से बातचीत की। उन्होंने अधिग्रहण , रोजगार, सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स और स्थानीय विकास से जुड़ी समस्याएँ सुनीं और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के साथ मिलकर उनका समाधान करने का आश्वासन दिया।



इलाके में विकास को मिलेगा बढ़ावा

मंत्री ने कठिन भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों में काम जारी रखने वाले इंजीनियरों, तकनीशियनों और मजदूरों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं क्षेत्र के विकास देश की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति के लिए महत्वपूर्ण है।
बता दें कि चिनाब बेसिन परियोजनाएं पूरी होने के बाद राष्ट्रीय ग्रिड में स्वच्छ ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी और रोजगार सृजन तथा बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार के माध्यम से जम्मू-कश्मीर के विकास में सहयोग मिलेगा।अधिकारियों का ये भी कहना है कि बढ़ी हुई जल विद्युत क्षमता उत्तरी भारत में बिजली की पीक पावर मांग पूरी करने और ग्रिड संचालन को स्थिर करने में मदद करेगा।

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