उज्जैन की जमीन को लेकर एक बार फिर मध्य प्रदेश की राजनीति गरमा गई है मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार सहित सरकारी योजनाओं को लेकर फायदा उठाने का आरोप लगाया जा रहा है ऐसा माना जा रहा है कि मोहन यादव ने अपनी सत्ता में रहकर करीब 168 एकड़ की जमीन खरीदी, उस समय यह जमीन कम कीमतों में मोहन यादव द्वारा खरीदी गई, लेकिन अब यह जमीन सरकारी हित के लिए उपयोग हो रही है जिस पर हाईवे, नई सड़के और साथ ही बड़े प्रोजेक्ट बनाए जा रहे हैं जिससे इन जमीनों की कीमत करोड़ों में बिक रही है।
जानें पूरा मामला
रिपोर्ट्स के मुताबिक दावा किया जा रहा है कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और और उनकी रियल एस्टेट कंपनी ने उज्जैन और आसपास के इलाकों की जमीन खरीदी, यह जमीन दिसंबर 2023 में खरीदी गई, जो करीबन 168 एकड़ में फैली हुई है। इस जमीन से सरकार अपने उपयोग में लेकर बड़े प्रोजेक्ट बना रही है जिससे इस जमीन की कीमत 45 करोड रुपए बताई जा रही है।
ग़ौरतलब है कि मोहन यादव मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री 13 दिसंबर 2023 को चुने गए थे जो कि मध्य प्रदेश के 19 वे मुख्यमंत्री कहलाते है लेकिन इस मामले में विपक्षी दल कांग्रेस ने मोहन यादव पर आरोप लगाए है कि अपनी सत्ता में रहकर मोहन यादव ने यह बड़ा खेल खेला जिससे यह जमीन अब करोड़ों रुपए की हो गई है।
BJP की सफाई
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस पूरे मामले को लेकर साजिश बताया और साथ ही इन सभी आरोपी को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि उन्होंने 2010 से रियल एस्टेट बिजनेस का काम शुरू किया और सीएम बनने के बाद उन्होंने अपना बिजनेस चालू रखा , जो की गैर कानूनी नहीं है लेकिन मैंने कोई गड़बड़ी नहीं की है। इस मामले में भाजपा अध्यक्ष का कहना है कि कांग्रेस हमेशा की तरह CM पर बेबुनियाद आरोप लगाती आ रही है और इस बार भी कांग्रेस गलत आरोप लगा रही है।
वही मध्य प्रदेश भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कांग्रेस के तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है उनका दावा है कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिजनों के नाम 2023 के चुनावी शपथ पत्र में जो जमीन दिखाई गई थी वही जस की तरफ अभी तक है किसी के भी नाम पर अतिरिक्त जमीन मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद नहीं ली गई है।
जमीन का ब्यूरो विवरण
- 2023 के चुनावी हलफनामे में मुख्यमंत्री मोहन यादव के नाम 17 एकड़ कृषि भूमि थी 2026 में भी इतनी ही है
- मुख्यमंत्री की पत्नी सीमा यादव के नाम 12.1 दोनों एकड़ भूमि थी जिसमें कोई बिस्तर नहीं हुआ
- जबकि पुत्र वैभव के नाम से भी 2023 में जो भूमि थी 26 में भी उतनी ही है
- मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 2017 में ही सिध्दीविनायक कंपनी से इस्तीफा दिया दवा है कि परिवार का रियल एस्टेट बिजनेस पुराना है
- मुख्यमंत्री को कांग्रेस द्वारा बदनाम करने की साजिश का भी दवा भाजपा ने किया है पार्टी का कहना है कि विपक्ष पिछड़े वर्ग से आने वाले मुख्यमंत्री को सहन नहीं कर पा रहा है
कुल मिलाकर देखा जाए तो भारतीय जनता पार्टी के मध्य प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल का बयान पूरी तरह से भूमि विवाद के बाद सवालों के कटघरे में खड़े हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को बचता हुआ नजर आ रहा है यानी पार्टी नेतृत्व ने जमीन से जुड़े पूरे मामले में होलिया तौर पर तो अपने मुख्यमंत्री मोहन यादव को क्लीन चिट दे दी है जबकि इसे राजनीतिक तौर पर मध्य प्रदेश की जनता के बीच भ्रम पैदा करने वाली साजिश भी करार दिया है।
कांग्रेस का आरोप
इस मामले में विपक्षी दल कांग्रेस का कहना है कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपनी सत्ता और अंदरूनी जानकारी का फायदा उठाकर जमीन खरीदी। इस मामले में राज्य कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी सुप्रीम कोर्ट में 15 सवाल पूछे जिस पर सुप्रीम कोर्ट के जज ने साफ कहा है कि इस पर उचित और सख्त निगरानी रखते हुए जांच होगी।
राज्य कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के साथ-साथ जयराम रमेश, केसी वेणुगोपाल सहित अन्य नेताओं ने भी मुख्यमंत्री पर जमीन विवाद को लेकर आरोप लगाए हैं और साथ ही मोहन यादव के इस्तीफा की मांग भी की है। कांग्रेस का कहना है कि यह मामला महाकाल की जमीन को लेकर लूट का मामला है। कांग्रेस ने इस मामले की न्यायिक जांच की मांग की है जिससे सच्चाई सामने आ सके।
