हनुमान जयंती 2026 में यह त्यौहार 2 अप्रैल को धूमधाम से मनाया जाएगा। हनुमान जयंती चैत्र की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है इस दिन भगवान हनुमान ने माता अंजनी की कोख से जन्म लिया था यह दिन भगवान हनुमान के जन्मोत्सव का प्रतीक माना जाता है 2026 में पूर्णिमा तिथि 1 अप्रैल 2026 की सुबह 7:06 बजे से शुरू होकर 2 अप्रैल की सुबह 7:41 बजे तक चलेगी, इसलिए सूर्य उदय तिथि के अनुसार हनुमान जयंती 2026 में 2 अप्रैल को ही धूमधाम से मनाई जाएगी।
जाने रोचक इतिहास
पौराणिक कथाओं के अनुसार हनुमान जयंती का पावन पर्व भगवान हनुमान के जन्मोत्सव का प्रतीक माना जाता है इसलिए इस दिन हनुमान जन्मोत्सव के रूप में हर्ष- उल्लास के साथ मनाते हैं। हनुमान जी के पिता का नाम पवन देव और माता का नाम अंजनी था इसलिए भगवान हनुमान को कई नाम जैसे केसरीनंदन, अंजनीपुत्र, आदि से जाना जाता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, ऐसा माना जाता है कि माता अंजनी देवी भगवान शिव की बहुत बड़ी भक्त थी भगवान शिव की पूजा- अर्चना करती थी माता अंजनी ने पुत्र प्राप्ति के लिए भगवान शिव की कठोर तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने माता अंजनी को वरदान दिया, “कि वे स्वयं उनकी कोक से पुत्र के रूप में जन्म लेंगे”।
राजा दशरथ ( राम जी के पिता ) ने भी पुत्र प्राप्ति के लिए भगवान से मनोकामना मांगी थी और बड़ा महायज्ञ किया था और उस यज्ञ से प्राप्त होकर खीर का एक छोटा सा अन्य पवन देव द्वारा अंजनी देवी तक जा पहुंचा और माता अंजनी ने उस अन्न को बड़े मन से घर ग्रहण किया और पुत्र प्राप्ति में भगवान शिव का स्वरूप भगवान हनुमान को जन्म दिया।
भगवान हनुमान के जन्म होने के बाद कई सारी लीला है जिसका वर्णन नहीं किया जा सकता, लेकिन भगवान की बचपन की भूख की कहानी सुनोगे तो हैरान रह जाओगे। दरअसल बचपन में हनुमान को भूख लगने पर सूर्य को आम फल समझकर खाने की कोशिश की और इस कोशिश में सूर्य देव को खाने चल दिए, लेकिन तभी इंद्रदेव ने उन्हें देख लिया और वह हैरान रह गए कि भगवान हनुमान यह क्या कर रहे है भगवान इंद्र ने उन्हें समझाने की कोशिश भी की लेकिन भगवान हनुमान नहीं माने, तब इंद्र देव ने उन्हें अपने वज्र से मार दिया, जिससे वह धरती पर जा गिरे। भगवान हनुमान के धरती पर गिरते ही आकाश पाताल में हाहाकार मच गया। सभी देवी- देवता भगवान हनुमान के पास पहुंचे साथी ही उनके माता-पिता भी, माता अपने पुत्र को देखकर काफी रो पड़ी और उनके पिता पवनदेव ने गुस्से में आकर अपने प्राण त्यागने की कोशिश की। उनकी इस कोशिश से पूरे पृथ्वी लोक में हाहाकार मच गया, पशु- पक्षी से लेकर मनुष्य सभी को सांस लेने में दिक्कत होने लगी, एक-एक करके सभी लोग अपने प्राण त्यागने लगे। यह देख देवताओं ने आकर हनुमान को बल, बुद्धि और अमरता का वरदान दिया।
भगवान हनुमान को संकट मोचन कहा जाता है वह अपने भक्तों के संकट हर लेते हैं। रामायण में वे श्री राम के परम भक्त बने, लक्ष्मण के लिए संजीवनी लाइन, रावण की लंका जलाई ऐसी उनकी कई सारी लीलाएं हैं और ऐसा माना जाता है कि हनुमान जी आज भी चिरंजीवी माने जाते हैं।
जाने पूजा विधि
2 अप्रैल 2026 को सुबह उठकर जल्दी स्नान करें, उसके बाद हनुमान जी की मूर्ति साफ करके लाल कलर का वस्त्र पहनाए और साथ ही हनुमान जी को सिंदूर, चंदन, फुल च चढ़ाएं। घी का दीपक जलाएं और प्रसाद में बूंदी के लड्डू, बेसन के लड्डू और रोडी आपका जो मन करे श्रद्धा से वह चढ़ा सकते हैं। इसके साथ ही हनुमान चालीसा, राम स्तुति धुन पढ़ें।